हार्मोन और गर्भनिरोधन #debunkTheMyth

हार्मोन और गर्भनिरोधन #debunkTheMyth

आज के समय में इंटरनेट जानकारियों का भंडार है और हमें सभी आवश्यक जानकारियां तुरंत प्रदान करता है, लेकिन बहुत सी बार हमें इंटरनेट से जानकारियों की बजाय मिथक प्राप्त होते हैं, जब हम हार्मोन और गर्भनिरोधन विधियों के बारे में चर्चा करते हैं तो इनके बारे में लोगों में व्याप्त मिथकों और गलत धारणाओं का उन्मूलन बहुत जरूरी हो जाता है, ताकि लोग वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय ले सके।

आइए, गर्भनिरोधन के एक उपाय के रूप में हार्मोन के प्रयोग से जुड़े मिथकों पर चर्चा करें।

मिथक: इनसे आपका वजन बढ़ जाएगा

गर्भनिरोधन के एक उपाय के रूप में हार्मोन का प्रयोग करने वाली अधिकांश महिलाओं के वजन में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होती है। उम्र बढ़ने और अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण वजन का बढ़ना स्वाभाविक है, और ये परिवर्तन इतने स्वाभाविक रूप से होते हैं कि कुछ महिलाओं को लगता है कि उनके हार्मोन लेने के कारण ये परिवर्तन हो रहे हैं। हालांकि, चिकित्सा अध्ययन बताते हैं कि औसत रूप से यह परिवर्तन आपकी गर्भनिरोधन विधि से संबंधित नहीं होते हैं।
महिलाओं के एक बहुत छोटे समूह के वजन में इनके कारण भिन्नता आ सकती है, लेकिन जैसे ही ये महिलाएं गर्भनिरोधन विधि का उपयोग करना बंद कर देगी, ये भिन्नताएं रुक जाएंगी और उनका वजन फिर से सामान्य हो जाएगा। वजन में आने वाली इस भिन्नता का अभी तक कोई कारण ज्ञात नहीं है।

मिथक: इनसे कैंसर होता है

वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि, गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करने वाली महिलाओं में, इस विधि का उपयोग न करने वाली महिलाओं के मुकाबले, स्तन कैंसर की संभावना थोड़ी अधिक होती है। लेकिन इससे यह सिद्ध नहीं होता है कि स्तन कैंसर और गर्भनिरोधक गोलियों के बीच कोई सीधा संबंध है, ना ही यह पता लगता है कि गोलियां लेना शुरू करने से पहले उस महिला के शरीर में कैंसर उपस्थित नहीं था।
दूसरी ओर, इस बात के प्रमाण उपलब्ध हैं कि, गर्भनिरोधक गोलियां लेने से एंडोमीट्रियल, ओवेरियन, कोलन और रेक्टल कैंसर की संभावनाओं में कमी आ जाती है।

मिथक: इससे बांझपन आता है

चूंकि यह एक हार्मोनल विधि है, इसलिए सभी महिलाएं गर्भनिरोधक छोड़ने के तुरंत बाद गर्भवती नहीं हो सकती हैं। हालांकि यह भी सच है कि अधिकतर मामलों में उनका साइकल वापस सामान्य होने तथा दोबारा गर्भधारण की संभावनाएं होने में बहुत से दिनों का समय लग सकता है, कई बार यह साइकल सामान्य होने में महीनों का समय लग जाता है। याद रखें, हर व्यक्ति अलग होता है और अध्ययन से पता चलता है लंबी अवधि के मामलों में, मौखिक गर्भनिरोधन उपायों का उपयोग करने वाली महिलाओं में इन गर्भनिरोधकों का गर्भधारण के संबंध में कोई विपरीत प्रभाव नहीं होता है।

मिथक: ये आपके स्तन के दूध के माध्यम से आपके शिशु तक पहुंच सकती हैं

यह पूरी तरह से एक मिथक है! यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य है कि किसी भी हार्मोनल गर्भनिरोधन विधि का उपयोग, आयतन और उपभोग को प्रभावित नहीं करता है और न ही नवजात शिशुओं में कोई संरचनात्मक दोष पैदा करता है। एस्ट्रोजन के उपयोग का एकमात्र दुष्प्रभाव यह हो सकता है कि आपके द्वारा उत्पादित दुग्ध की मात्रा में थोड़ी कमी आ सकती है, हालांकि इसकी पोषकता में कोई बदलाव नहीं होता है।

मिथक: युवा महिलाओं को गर्भनिरोधक के रूप में हार्मोन का उपयोग नहीं करना चाहिए

हार्मोनल विधियों का उपयोग किसी भी महिला द्वारा किया जा सकता है, इसके लिए कोई भी अधिकतम या न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं है। यहां तक कि कई चिकित्सा संस्थान जैसे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन किशोरवय लड़कियों को गर्भनिरोधक गोली का उपयोग करने की सलाह देते हैं, यही सलाह स्तनपान करवा रही महिलाओं को भी दी जाती है, क्योंकि यह परिवार नियोजन का एक बेहतरीन तरीका है।

हम आपको यही सुझाव देंगे कि आप जब भी गर्भनिरोधन विधियों का उपयोग करना शुरू करना चाहें, सबसे पहले एक चिकित्सक से मिलें, जो आपके मेडिकल इतिहास और आपकी स्थिति के अनुसार आपको सर्वश्रेष्ठ सुझाव देगा।

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